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May 15, 2018, 20 tweets

वीर छत्रपति सम्भाजी महाराज के जन्मदिवस पर उनके अप्रतिम साहस को श्रद्धांजलि देती एक काव्य रचना प्रस्तुत कर रही हूँ | 14 कड़ियों की यह कविता भारत माँ के उस वीर पुत्र की स्मृति को ताजा करने का एक छोटा सा प्रयास है! आशा है आप पढेंगे व आगे सांझा करेंगे 🙏

#भारतीय_इतिहास
#संभाजीमहाराज

शिवाजी महाराज के जीवन का
सूरज हुआ जब अस्त था
जब औरंगजेब का आतंक छाया
भारत की भू पर समस्त था
तब निकल कर बंदीघर से चन्द्रमा
सम्भाजी राजे चमका था
मानो उठकर गहरे सागर तल से
नव तेजपुंज एक दमका था

#संभाजीमहाराज
#भारतीय_इतिहास
#अनकही

वह बालक जो कभी पिता संग
दिल्ली दरबार में पहुंचा था
जिसने वहां देखा निज नयनों से
मुग़ल सुलतान का धोखा था
महल के भीतर साथ शिवाजी के
अचानक था नज़रबंद हुआ
फिर फल के टोकरों में सिमटकर
था निकला पुनः स्वछन्द हुआ

#संभाजीमहाराज
#भारतीय_इतिहास
#अनकही

वही बालक अब हुआ युवक था
वही बनकर सिंह दहाडा था
बढ़ दक्षिण भारत के चप्पे चप्पे से
मुग़लों का पैर उखाड़ा था
पुर्तगालियों पर चढ़ कर उनका भी
भंग किया झूठा अभिमान
स्थल और जल सब दिश में छाया
संभाजी का उज्जवल नाम

#संभाजीमहाराज
#भारतीय_इतिहास
#अनकही

विधर्म के बढ़ते अन्धकार से लड़ता
सनातन का योद्धा प्रचंड
शत्रु को चखाता स्वाद पराजय का
स्थान स्थान पर वीर उद्दंड
नहीं डरता शूर किंचित मृत्यु से
न तस साहस की कोई थाह
लश्कर औरंगजेब का विशाल था
उससे बड़ा उसका उत्साह

#संभाजीमहाराज
#भारतीय_इतिहास
#अनकही

‘हर हर महादेव’ का स्वर गूंजा था
‘जय भवानी’ का नारा था
लहराया हर दुर्ग पर भगवा ध्वज
हिन्दू का शौर्य हुंकारा था
लड़ता रहा नौ वर्ष पर्यंत विक्रमी
नहीं एक दिन करा विश्राम
जब तक लड़ा तब तक सम्भाजी ने
किया उन्नत भारत का नाम

#संभाजीमहाराज
#भारतीय_इतिहास
#अनकही

फिर आया वह दिवस जब लगा
चन्द्रमा को ग्रहण अकस्मात
विश्वासघात किया अपनों ने और
पड़ गया वीर शत्रु के हाथ
बना कर बंदी ले गये सिंह को
धोखे से कायर वह श्वान
किया प्रस्तुत दरबार में जा कर
जहां विराजा मुग़ल सुलतान

#संभाजीमहाराज
#भारतीय_इतिहास
#अनकही

छटपटाता वह वीर था क्षण क्षण
रग रग में रक्त रहा खोला
छोड़ दो देखें हम वीरता इसकी
कर अट्टहास औरंगजेब बोला
सेना को हुआ था हुक्म लड़ने का
सैकड़ों से लड़ा अकेला वह
नहीं रुका था वह पल भर को भी
प्रचंड पराक्रमी अलबेला वह

#संभाजीमहाराज
#भारतीय_इतिहास
#अनकही

थक कर चूर हुआ जब अंततः
गिरा था भूमि पर वीर नरेश
तब घुमाने लगे दरबार में सैनिक
पहना कर उसे बंदर का वेश
भांति भांति से करते थे प्रताड़ित
सब प्रकार से करते अपमान
बहु दिवस तक देते रहे त्रास कि
कबूल करो सम्भाजी इस्लाम

#संभाजीमहाराज
#भारतीय_इतिहास
#अनकही

हिन्दू जननी का हूँ पुत्र मैं गर्वित
हिन्दू तन हिन्दू मन मेरा
रोम रोम मेरे बसता है सनातन
न मान सकूं आदेश मैं तेरा
नहीं राज्य का लोभ कभी मुझको
न धन न वैभव की है चाह
माँ भवानी मेरे ह्रदय हैं विराजित
उन्हीं के वन्दन का उत्साह

#संभाजीमहाराज
#भारतीय_इतिहास
#अनकही

तू चाहे अपनी शहजादी का भी
मुझसे करवाए विवाह यदि
नहीं छोडूं फिर भी सनातन को मैं
होवे हर भांति से लाभ यदि
क्या यह तन? क्या ऐश्वर्य जीवन के?
मैं तो आत्म का अनुगामी
परमानंद मेरे भीतर बस रहा
मैं सदा हिंदुत्व का सेनानी

#संभाजीमहाराज
#भारतीय_इतिहास
#अनकही

गरज गरज वह ऐसे बोल रहा था
गुंजा रहा था धरा आकाश
देख कर उसका अदम्य साहस
होता था सुलतान हताश
काट दो इसकी जीभ कि जिससे
लेता है भवानी का नाम
फिर पूछो इस उद्दंड काफिर से
क्या करेगा कबूल इस्लाम

#संभाजीमहाराज
#भारतीय_इतिहास
#अनकही

कटी जिह्वा नहीं झुका किन्तु सिर
लिखकर फिर वही बात कही
मेरी आराध्य सदा सदा भवानी
जन्म जन्म हैं मेरी मात वही
फिर गए नयन दो उसके निकाले
फिर भी उत्साह न क्षीण हुआ
बाघ नखों से नुचवाई गयी चमड़ी
न पराजित फिर भी प्रवीण हुआ

#संभाजीमहाराज
#भारतीय_इतिहास
#अनकही

रहा डटा सनातन की वेदी पर वह
नहीं पीड़ा से उठा चीत्कार
बूँद बूँद बहता रहा रक्त देह से
नहीं विधर्म फिर भी स्वीकार
आश्चर्यचकित देख दरबार था सारा
किस मिट्टी का बना यह वीर
नहीं प्रभाव किसी कष्ट का इस पर
टूक टूक हुआ है युवा शरीर

#संभाजीमहाराज
#भारतीय_इतिहास
#अनकही

शीश काट कर फिर सम्भाजी का
मुग़लों ने जश्न मनाया था
कई दिवस तक कायर दुश्मन ने
शूरवीर का निधन मनाया था
टुकड़े टुकड़े कर तन के उसके
कुत्तों को भोज करवाया था
रो उठी थी मानवता देख कर
ऐसा दृश्य क्रूर दिखालाया था

#संभाजीमहाराज
#भारतीय_इतिहास
#अनकही

नहीं आज मही पर संभाजी राजे
न शिवाजी न प्रताप यहाँ
पुनः है सनातन घिरा संकट में
पुनः विधर्म का ताप यहाँ
उठो वीर, अब प्रमाद को त्यागो
माँ भवानी ने पुकारा है
शास्त्र पढो, व शस्त्र करो धारण
कर्तव्य यही आज तिहारा है

#संभाजीमहाराज
#भारतीय_इतिहास
#अनकही

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